Online Shopping New Rules: ऑनलाइन शॉपिंग करते समय किसी प्रोडक्ट पर 70 या 80 फीसदी की छूट देखकर अक्सर लगता है कि इससे बेहतर डील शायद ही मिले। लेकिन कई बार डिस्काउंट का बड़ा आंकड़ा देखकर हम यह जांचना भूल जाते हैं कि सामान की पुरानी कीमत वास्तव में क्या थी और बचत कितनी हुई। अब इसी तरह के भ्रामक डिस्काउंट पर सरकार शिकंजा कसने की तैयारी में है।
सरकार ने ई-कॉमर्स से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं। नए प्रावधानों का मकसद ऑनलाइन खरीदारी में कीमत, छूट, सर्च रिजल्ट और ग्राहक शिकायतों को लेकर ज्यादा पारदर्शिता लाना है। इन बदलावों का असर ग्राहकों के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वहां सामान बेचने वाले कारोबारियों पर भी पड़ेगा।
कब से लागू होंगे नए नियम?
संशोधित नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होने हैं। इसके बाद ई-कॉमर्स कंपनियों को ग्राहकों को ऑफर दिखाते समय सिर्फ आकर्षक डिस्काउंट बताना पर्याप्त नहीं होगा। कीमत से जुड़ी अहम जानकारी भी स्पष्ट करनी होगी, ताकि ग्राहक किसी ऑफर की वास्तविक बचत को बेहतर तरीके से समझ सके।
डिस्काउंट देखकर अब ऐसे नहीं होगा फैसला
मान लीजिए किसी प्रोडक्ट पर भारी छूट दिखाई जा रही है। नए नियमों के तहत डिस्काउंट वाली कीमत के साथ उस सामान की पिछली कीमत की जानकारी भी देनी होगी।
यह पिछली कीमत उस कीमत से जुड़ी होगी जिस पर संबंधित प्रोडक्ट को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पिछले 30 दिनों के दौरान बेचा गया था। इसका उद्देश्य ऐसी स्थिति को रोकना है जिसमें किसी सामान की कीमत पहले बढ़ाई जाए और फिर उसी बढ़ी हुई कीमत पर बड़ी छूट दिखाकर ग्राहक को आकर्षित किया जाए।
यानी आगे चलकर ग्राहक के लिए यह समझना आसान हो सकता है कि स्क्रीन पर दिखाई जा रही छूट वास्तव में कितनी फायदेमंद है।
सर्च में ऊपर दिखने वाला हर प्रोडक्ट सबसे अच्छा नहीं होगा (Online Shopping New Rules)
ऑनलाइन शॉपिंग में हम अक्सर सर्च करके ऊपर दिखाई देने वाले प्रोडक्ट को ही पहले देखते हैं। लेकिन क्या वह सबसे अच्छा प्रोडक्ट होता है? जरूरी नहीं।
नए नियमों में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के सर्च सिस्टम को लेकर भी पारदर्शिता पर जोर दिया गया है। कंपनियों को इस तरह से सर्च रिजल्ट बदलने से बचना होगा जिससे ग्राहक किसी खास नतीजे की ओर अनुचित तरीके से प्रभावित हो।
इसके अलावा स्पॉन्सर्ड लिस्टिंग की पहचान भी ग्राहक के लिए स्पष्ट होनी चाहिए। यानी ग्राहक को पता चल सके कि कोई प्रोडक्ट सामान्य सर्च रिजल्ट में आया है या पैसे देकर उसे ऊपर दिखाया गया है।
खरीदारी के दौरान आपको किस तरह प्रभावित किया जा रहा है, इस पर भी नजर
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कई बार ऐसे डिजाइन और तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं जो ग्राहक को किसी खास विकल्प को चुनने के लिए प्रेरित करते हैं। इन्हें आम तौर पर डार्क पैटर्न कहा जाता है।
सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए डार्क पैटर्न से जुड़े नियमों के पालन को भी महत्वपूर्ण बनाया है। कंपनियों को हर साल अपने प्लेटफॉर्म का सेल्फ ऑडिट करना होगा और नियमों के अनुपालन से जुड़ा सर्टिफिकेट भी उपलब्ध कराना होगा।
इसका सीधा मकसद यह है कि ग्राहक की पसंद को चालाकी से प्रभावित करने वाले तरीकों पर नजर रखी जा सके।
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