Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष को हिंदू धर्म में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का समय माना जाता है। इस दौरान श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य जैसे कार्य किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं में पितृपक्ष के दौरान खान-पान और दिनचर्या के साथ खरीदारी को लेकर भी कुछ परंपराएं बताई गई हैं। मान्यता है कि इस अवधि में कुछ विशेष वस्तुओं को घर लाना शुभ माना जाता है, जबकि कुछ चीजों की खरीदारी टालने की सलाह दी जाती है। इस वर्ष पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर 2026 से मानी जा रही है।
श्राद्ध से जुड़ी सामग्री खरीदना माना जाता है शुभ
पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध और तर्पण में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं की खरीदारी को धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है। काले तिल, जौ, चावल, कुशा, धूप, दीपक और पूजा-पाठ से जुड़ी सामग्री इस दौरान खरीदी जा सकती है। इन वस्तुओं का उपयोग श्राद्ध कर्म में करने के अलावा जरूरतमंद लोगों को दान भी किया जाता है।
काले तिल और गंगाजल का विशेष महत्व (Pitru Paksha 2026)
पितृपक्ष में काले तिल का इस्तेमाल तर्पण के दौरान किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तिल से किया गया तर्पण पितरों को समर्पित माना जाता है। इसी तरह गंगाजल को भी पूजा और तर्पण में महत्वपूर्ण माना गया है। इसे घर के पूजा स्थान में रखा जा सकता है और धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल किया जाता है।
तांबे-पीतल के बर्तन खरीदने की भी मान्यता
धार्मिक परंपराओं में तांबे, पीतल और कांसे के बर्तनों को पूजा-पाठ में उपयोगी माना गया है। इसलिए पितृपक्ष के दौरान जरूरत के अनुसार ऐसे बर्तन खरीदने को कुछ मान्यताओं में शुभ बताया जाता है।
इन चीजों की खरीदारी से बचने की सलाह
लोक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष के दौरान कुछ नई और भौतिक सुख-सुविधा से जुड़ी चीजों की खरीदारी टालने की परंपरा है। इनमें नए कपड़े, सोने-चांदी के आभूषण, नया वाहन, जमीन या मकान, लोहे से बनी वस्तुएं और नए जूते-चप्पल शामिल हैं। कुछ परंपराओं में इस दौरान नई झाड़ू खरीदने और शादी जैसे मांगलिक कार्यों से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी से भी बचने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं ये बातें
पितृपक्ष में क्या खरीदना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए, इससे जुड़ी मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकती हैं। इसलिए इन्हें धार्मिक परंपरा और लोक आस्था के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इन मान्यताओं के समर्थन में कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
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