SBI FD Interest Rate: अगर आपका खाता भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में है या आप इस बैंक में एफडी कराने की योजना बना रहे हैं, तो जमा पर मिलने वाले ब्याज से जुड़ी यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। बैंक के चेयरमैन सीएस शेट्टी के बयान के मुताबिक, आने वाले दो से तीन महीनों में जमा पर ब्याज दरें बढ़ने की संभावना फिलहाल कम दिखाई दे रही है। ऐसे में अधिक ब्याज मिलने की उम्मीद कर रहे ग्राहकों को अभी इंतजार करना पड़ सकता है।
फिलहाल क्यों नहीं बढ़ेंगी जमा पर ब्याज दरें?
सीएस शेट्टी के अनुसार, बैंकिंग व्यवस्था में इस समय पर्याप्त नकदी उपलब्ध है। यही वजह है कि निकट भविष्य में जमा पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की तत्काल जरूरत दिखाई नहीं दे रही है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आगे भी दरें नहीं बढ़ेंगी। परिस्थितियों में बदलाव होने पर बैंक अपने फैसले की समीक्षा कर सकते हैं।
जमा पर ब्याज की दरें उन ग्राहकों के लिए खास मायने रखती हैं, जो अपनी बचत को एफडी या दूसरी बैंक जमा योजनाओं में रखते हैं। ब्याज दरों में बदलाव होने पर उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ सकता है।
रेपो रेट बढ़ने से कर्ज लेने वालों पर क्या असर पड़ेगा?
भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से रेपो रेट में बढ़ोतरी किए जाने के बाद बैंकिंग क्षेत्र में कर्ज की ब्याज दरों को लेकर भी हलचल देखने को मिली। दी गई जानकारी के अनुसार, आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी करके इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया था।
इसके बाद पंजाब नेशनल बैंक, इंडियन बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा सहित कुछ बैंकों ने अपनी कर्ज दरों में बढ़ोतरी की। इसका असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है, जिनके ऋण की ब्याज दर बाहरी मानक या रेपो रेट से जुड़ी हुई है। हालांकि, प्रत्येक ग्राहक की ईएमआई में कितना बदलाव होगा, यह उसके ऋण की शर्तों और ब्याज दर पर निर्भर करेगा।
SBI के मुनाफे पर पड़ सकता है सकारात्मक असर
सीएस शेट्टी का मानना है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फायदा अगले दो से तीन तिमाहियों तक बैंक के शुद्ध ब्याज मार्जिन यानी एनआईएम पर दिखाई दे सकता है। यह बैंक की ब्याज से होने वाली कमाई और ब्याज के रूप में किए जाने वाले भुगतान के बीच के अंतर से संबंधित एक महत्वपूर्ण माप है।
हालांकि, बैंक की वास्तविक कमाई कई कारकों पर निर्भर करेगी। इसमें जमा पर चुकाया जाने वाला ब्याज, कर्ज से मिलने वाला ब्याज और बाजार की परिस्थितियां शामिल हैं।
कर्ज बांटने के लिए बैंकों को बढ़ानी पड़ सकती हैं जमा दरें
एसबीआई चेयरमैन के मुताबिक, यदि कर्ज की मांग इसी तरह मजबूत बनी रहती है, तो भविष्य में कुछ बैंकों को अधिक धन जुटाने की जरूरत पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में ग्राहकों से जमा आकर्षित करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी का विकल्प अपनाया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि महंगाई को ध्यान में रखते हुए जमाकर्ताओं को अपनी बचत पर उचित वास्तविक रिटर्न मिलना जरूरी है। इसका अर्थ है कि ब्याज से होने वाली कमाई की तुलना महंगाई के असर से भी की जानी चाहिए।
SBI के कर्ज कारोबार को लेकर क्या है उम्मीद?
सीएस शेट्टी ने भरोसा जताया कि एसबीआई अपने कर्ज कारोबार में 14 से 15 प्रतिशत की वृद्धि बनाए रखने में सक्षम होगा। बैंक के लिए कर्ज की मांग और उसे पूरा करने के लिए जरूरी धन के बीच संतुलन बनाए रखना अहम रहेगा।
ग्राहकों के लिए इसका मतलब है कि आने वाले महीनों में जमा और कर्ज की ब्याज दरों में बदलाव पर नजर रखना जरूरी होगा। खासकर एफडी कराने या नया ऋण लेने की योजना बना रहे लोगों को बैंक की आधिकारिक ब्याज दरों और शर्तों की जांच करने के बाद ही फैसला लेना चाहिए।
बैंकों में पांच दिन कामकाज की मांग पर क्या बोले चेयरमैन?
बैंक कर्मचारियों की ओर से सप्ताह में पांच दिन कामकाज की व्यवस्था लागू करने की मांग भी चर्चा में है। भारतीय बैंक संघ के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने बताया कि इस विषय पर गठित समिति के माध्यम से बैंक प्रबंधन संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रहे हैं।
इस मांग को लेकर बैंक कर्मचारी संगठनों ने सितंबर में व्यापक हड़ताल की चेतावनी भी दी थी। फिलहाल ग्राहकों को पांच दिन के कार्य सप्ताह को लेकर किसी अंतिम फैसले की जानकारी के लिए आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।

