Clove Benefits: भारतीय रसोई में कई ऐसी चीजें मौजूद होती हैं, जिनका इस्तेमाल खाने का स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए किया जाता है। इन्हीं में से एक है लौंग। आकार में छोटी दिखने वाली यह मसाला सदियों से घरेलू खानपान का हिस्सा रही है। चाय, मसाला दूध से लेकर कई तरह के व्यंजनों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। लौंग में कुछ ऐसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं, जिनकी वजह से इसे पारंपरिक रूप से स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता है।
लौंग में क्या खास होता है?
लौंग में मुख्य रूप से यूजेनॉल नामक प्राकृतिक यौगिक पाया जाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने से जुड़े गुणों पर वैज्ञानिक स्तर पर अध्ययन हुए हैं। यही वजह है कि लौंग को केवल मसाले के तौर पर ही नहीं, बल्कि पारंपरिक घरेलू उपायों में भी जगह मिली है। हालांकि, किसी बीमारी का इलाज केवल लौंग से करने का दावा सही नहीं माना जाना चाहिए।
दांत और मुंह की परेशानी में मिल सकती है राहत
लौंग का इस्तेमाल लंबे समय से दांत और मुंह से जुड़ी असहजता में घरेलू तौर पर किया जाता रहा है। इसमें मौजूद यूजेनॉल में दर्द कम करने और कुछ प्रकार के सूक्ष्मजीवों के खिलाफ प्रभाव से जुड़े गुण पाए गए हैं। इसी कारण लौंग का तेल कुछ दंत उत्पादों में भी इस्तेमाल होता है। फिर भी तेज दांत दर्द, सूजन या संक्रमण होने पर घरेलू उपाय के बजाय दंत चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है।
पाचन के लिए भी उपयोगी हो सकती है लौंग (Clove Benefits)
खाने के बाद थोड़ी लौंग का इस्तेमाल करने की परंपरा कई घरों में देखने को मिलती है। इसे पाचन से जुड़ी हल्की परेशानी और मुंह की दुर्गंध में पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता रहा है। हालांकि, पेट से जुड़ी लगातार समस्या होने पर सिर्फ लौंग पर निर्भर रहना उचित नहीं है।
एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर को दे सकते हैं सहारा
हमारे शरीर में बनने वाले मुक्त कण कोशिकाओं पर ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ा सकते हैं। लौंग में मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिक एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि से जुड़े पाए गए हैं। संतुलित खानपान का हिस्सा बनाकर मसालों से मिलने वाले ऐसे यौगिक शरीर की सामान्य पोषण संबंधी जरूरतों में योगदान दे सकते हैं।
सर्दियों में क्यों याद आती है लौंग?
ठंड के मौसम में कई लोग लौंग को चाय, काढ़े या गर्म पेय में शामिल करते हैं। इसकी खुशबू और तीखा स्वाद गर्म पेय को अलग स्वाद देता है। गले में हल्की खराश या असहजता होने पर भी कुछ लोग इसका पारंपरिक रूप से इस्तेमाल करते हैं। लेकिन तेज गले के दर्द, बुखार या संक्रमण के लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
लौंग का सेवन कितना करना चाहिए?
लौंग मसाला है, इसलिए इसे कम मात्रा में ही लेना बेहतर माना जाता है। ज्यादा मात्रा में लौंग या लौंग का तेल लेने से पेट में जलन जैसी परेशानी हो सकती है। खास तौर पर लौंग का तेल सीधे मुंह से लेना सुरक्षित नहीं माना जाना चाहिए। बच्चों, गर्भवती महिलाओं, खून पतला करने वाली दवा लेने वाले लोगों या किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति को नियमित रूप से अधिक मात्रा में लौंग लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
लौंग को चमत्कारी इलाज समझना सही नहीं
लौंग में कई उपयोगी प्राकृतिक यौगिक जरूर पाए जाते हैं, लेकिन इसे किसी बीमारी की दवा या इलाज का विकल्प नहीं माना जा सकता। इसका सबसे अच्छा इस्तेमाल सामान्य खानपान में सीमित मात्रा में मसाले के रूप में किया जा सकता है। किसी बीमारी के लक्षण लगातार बने रहें तो घरेलू नुस्खों के बजाय सही जांच और डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता देना जरूरी है।

