Brain Stroke Symptoms: स्ट्रोक आने से पहले शरीर देता है ये संकेत, लापरवाही पड़ सकती है भारी; जानें बचाव के जरूरी तरीके

Brain Stroke Symptoms: स्ट्रोक आने से पहले शरीर कुछ चेतावनी संकेत दे सकता है। चेहरे का टेढ़ा होना, हाथ-पैर में कमजोरी और बोलने में परेशानी जैसे लक्षणों को पहचानें। जानें ब्रेन स्ट्रोक से बचाव के जरूरी तरीके।

Brain Stroke Symptoms: स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें समय पर इलाज मिलना बेहद जरूरी होता है। इसमें दिमाग तक पहुंचने वाले खून और ऑक्सीजन के प्रवाह में रुकावट आ सकती है या किसी रक्त वाहिका के फटने से मस्तिष्क में ब्लीडिंग होने लगती है। ऑक्सीजन की कमी के कारण ब्रेन सेल्स तेजी से प्रभावित हो सकती हैं। यही वजह है कि स्ट्रोक के मामले में इलाज में थोड़ी भी देरी गंभीर परिणाम दे सकती है।

स्ट्रोक इतना खतरनाक क्यों माना जाता है?

स्ट्रोक के दौरान दिमाग के किसी हिस्से को पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इससे शरीर के अलग-अलग हिस्सों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। गंभीर स्थिति में मरीज को हाथ-पैर में कमजोरी या लकवा, बोलने और समझने में परेशानी, चलने में दिक्कत और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

अचानक दिखें ये लक्षण तो तुरंत हो जाएं सतर्क

स्ट्रोक के लक्षण अक्सर अचानक सामने आते हैं। शरीर के एक हिस्से में सुन्नपन या कमजोरी, बोलने में परेशानी, अचानक भ्रम की स्थिति, देखने में दिक्कत, चलने में असंतुलन या बिना किसी स्पष्ट कारण के तेज सिरदर्द इसके संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों को सामान्य समझकर इंतजार करना खतरनाक हो सकता है।

लक्षण कुछ देर में ठीक हो जाएं, फिर भी खतरा टला नहीं (Brain Stroke Symptoms)

कई बार स्ट्रोक जैसे लक्षण थोड़ी देर बाद अपने आप कम या पूरी तरह खत्म हो जाते हैं। लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) हो सकती है, जिसे भविष्य में होने वाले बड़े स्ट्रोक की चेतावनी माना जाता है। इसलिए लक्षण खत्म होने के बाद भी जल्द से जल्द डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

स्ट्रोक के लक्षण दिखें तो तुरंत क्या करें?

अगर किसी व्यक्ति में स्ट्रोक के संकेत दिखाई दें तो सबसे पहले तुरंत मेडिकल सहायता या एंबुलेंस की मदद लें। मरीज को ऐसे अस्पताल ले जाना बेहतर होता है जहां स्ट्रोक के इलाज की उचित सुविधा उपलब्ध हो।

डॉक्टर के लिए यह जानकारी भी महत्वपूर्ण होती है कि लक्षण पहली बार किस समय दिखाई दिए थे या मरीज आखिरी बार कब बिल्कुल सामान्य था। इसलिए समय को नोट कर लेना चाहिए। इलाज में यह जानकारी काफी उपयोगी हो सकती है।

मरीज को खाना-पानी या अपनी तरफ से दवा न दें

स्ट्रोक के दौरान निगलने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में मरीज को जबरदस्ती खाना या पानी देने से परेशानी हो सकती है। इसी तरह बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा नहीं देनी चाहिए। खासतौर पर एस्पिरिन जैसी दवा खुद से देना सही नहीं है, क्योंकि हर स्ट्रोक खून का थक्का बनने की वजह से नहीं होता। कुछ मामलों में दिमाग के अंदर रक्तस्राव भी हो सकता है और दोनों स्थितियों का इलाज अलग-अलग होता है।

हर स्ट्रोक में खून का थक्का नहीं बनता

स्ट्रोक का एक कारण रक्त वाहिका में ब्लॉकेज होना है, लेकिन कुछ मामलों में दिमाग की नस फटने से भी ब्लीडिंग हो सकती है। ब्रेन एन्यूरिज्म के फटने जैसी स्थिति में भी मस्तिष्क में रक्तस्राव हो सकता है। ऐसे मरीजों में ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करना, कुछ दवाओं के प्रभाव को जरूरत के अनुसार उलटना और समय पर न्यूरोसर्जिकल या एंडोवास्कुलर उपचार देना जरूरी हो सकता है।

स्ट्रोक से बचने के लिए किन बातों का रखें ध्यान?

स्ट्रोक के जोखिम को कम करने के लिए ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना जरूरी है। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित खान-पान, पर्याप्त नींद और धूम्रपान से दूरी भी महत्वपूर्ण है। अगर पहले से कोई बीमारी या स्ट्रोक का जोखिम बढ़ाने वाली समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच और दवाएं लेना चाहिए।

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