Vijayadashami: दशहरा यानी विजयादशमी का त्योहार भारत में बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस दिन कहीं भगवान श्रीराम की विजय की खुशी में रावण के पुतले जलाए जाते हैं, तो कहीं मां दुर्गा की आराधना के साथ उत्सव का समापन होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के अलावा दुनिया के कई दूसरे देशों में भी यह त्योहार धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं के साथ मनाया जाता है?
नेपाल से लेकर अमेरिका तक, भारतीय और हिंदू समुदाय के लोग दशहरे से जुड़ी परंपराओं को आज भी जीवित रखे हुए हैं। हालांकि, हर देश में इसे मनाने का तरीका एक जैसा नहीं है। कुछ जगहों पर दुर्गा पूजा प्रमुख होती है, जबकि कुछ देशों में मंदिरों में विशेष पूजा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और रामायण पर आधारित प्रस्तुतियां आयोजित की जाती हैं। आइए जानते हैं कि भारत के अलावा किन देशों में दशहरे का खास महत्व है और वहां यह त्योहार किस तरह मनाया जाता है।
नेपाल में 15 दिनों तक चलता है दशईं का उत्सव
नेपाल में दशहरे को ‘दशईं’ के नाम से जाना जाता है। यह वहां के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक त्योहारों में से एक है। इस दौरान मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है और परिवार के लोग एक-दूसरे के साथ त्योहार की खुशियां साझा करते हैं।
नेपाल में दशईं का उत्सव कई दिनों तक चलता है। इस दौरान घरों और मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। विजयादशमी के दिन बड़े-बुजुर्ग परिवार के छोटे सदस्यों के माथे पर टीका लगाते हैं और उन्हें जमरा देते हुए सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। जमरा जौ या अन्य अनाज के उगाए गए अंकुर होते हैं, जिनका धार्मिक महत्व है।
नेपाल में दशईं का मुख्य आकर्षण परिवारों का एक साथ आना, देवी दुर्गा की आराधना और पारंपरिक रीति-रिवाज हैं। यहां त्योहार का स्वरूप भारत के कई हिस्सों में मनाए जाने वाले दशहरे से अलग दिखाई देता है।
बांग्लादेश में दुर्गा पूजा के बाद होता है विजयादशमी का आयोजन (Vijayadashami)
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के लिए दुर्गा पूजा प्रमुख धार्मिक त्योहारों में शामिल है। इस दौरान विभिन्न शहरों और कस्बों में पूजा पंडाल सजाए जाते हैं। मां दुर्गा की प्रतिमाओं की स्थापना कर कई दिनों तक पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
विजयादशमी के दिन धार्मिक परंपराओं के अनुसार मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु मां दुर्गा को विदाई देते हैं और अगले वर्ष फिर से उनके आगमन की कामना करते हैं।
ढाका समेत बांग्लादेश के कई इलाकों में दुर्गा पूजा के दौरान मंदिरों और पूजा स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है। रमना काली मंदिर, सिद्धेश्वरी काली मंदिर और ढाका विश्वविद्यालय के जगन्नाथ हॉल जैसे स्थान धार्मिक गतिविधियों के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, पूजा पंडालों की संख्या और आयोजन का स्तर हर वर्ष अलग हो सकता है।
श्रीलंका में मंदिरों में पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों की परंपरा
श्रीलंका में भी हिंदू समुदाय नवरात्रि और विजयादशमी से जुड़ी धार्मिक परंपराओं का पालन करता है। यहां विशेष रूप से तमिल हिंदू समुदाय के लोग मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।
भारत के उत्तर भारतीय क्षेत्रों की तरह श्रीलंका में हर जगह बड़े पैमाने पर रावण दहन की परंपरा प्रचलित नहीं है। यहां दशहरे से जुड़े आयोजन समुदाय, मंदिर और स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ स्थानों पर रामायण से संबंधित धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
श्रीलंका में दशहरे का स्वरूप मुख्य रूप से धार्मिक आस्था और मंदिरों से जुड़ी परंपराओं पर आधारित है। इसलिए यहां इस त्योहार को मनाने का तरीका भारत के अलग-अलग राज्यों से काफी भिन्न हो सकता है।
अमेरिका में भारतीय समुदाय के लोग मनाते हैं दशहरा
अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के लोग भी दशहरा और विजयादशमी को उत्साह के साथ मनाते हैं। कैलिफोर्निया, न्यू जर्सी, टेक्सास, इलिनोइस और जॉर्जिया समेत कई राज्यों में भारतीय समुदाय के लोग धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
इन आयोजनों में पूजा-पाठ, रामलीला, संगीत, नृत्य और सामुदायिक मिलन जैसे कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं। कुछ जगहों पर रावण के पुतले का दहन भी किया जाता है, जबकि अन्य आयोजनों में भगवान श्रीराम की विजय को नाट्य प्रस्तुतियों और धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए दर्शाया जाता है।
अमेरिका में दशहरे के आयोजन भारतीय मूल के परिवारों के लिए अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने का अवसर भी होते हैं। खासकर बच्चों और युवाओं को भारतीय त्योहारों की परंपराओं से परिचित कराने के लिए ऐसे कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, कार्यक्रमों की तारीख, स्थान और स्वरूप आयोजकों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
विदेशों में दशहरा मनाने का तरीका भारत से कितना अलग है?
भारत में दशहरा अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न परंपराओं के साथ मनाया जाता है। उत्तर भारत के कई हिस्सों में रामलीला और रावण दहन प्रमुख आकर्षण होते हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के कई इलाकों में दुर्गा पूजा के बाद विजयादशमी का विशेष महत्व है।
विदेशों में भी इन परंपराओं का पालन स्थानीय परिस्थितियों और वहां रहने वाले समुदायों के अनुसार किया जाता है। नेपाल में दशईं के दौरान टीका और जमरा की परंपरा प्रमुख है, जबकि बांग्लादेश में दुर्गा पूजा और प्रतिमा विसर्जन का विशेष महत्व है। अमेरिका में भारतीय समुदाय अपनी सुविधा और स्थानीय आयोजनों के अनुसार धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करता है।
इस तरह दशहरे का उत्सव अलग-अलग देशों में अलग रूप जरूर लेता है, लेकिन इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक भावना काफी हद तक समान रहती है।
दशहरा क्यों मनाया जाता है?
दशहरा या विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने इसी दिन रावण पर विजय प्राप्त की थी। वहीं, दुर्गा पूजा की परंपरा में यह दिन मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय से जुड़ा है।
इसी वजह से इस त्योहार को केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सत्य, साहस और धर्म की जीत के संदेश के रूप में भी देखा जाता है। देश और विदेश में रहने वाले लोग अपनी-अपनी परंपराओं के अनुसार इस पर्व को मनाते हैं।

