Food Inflation India: कमज़ोर मानसून बढ़ा सकता है महंगाई, दूध-दाल से लेकर सब्जियों तक महंगे होने के संकेत

Food Inflation India: विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई और अगस्त का मानसून इस पूरे सीजन की तस्वीर बदल सकता है। यदि इन महीनों में अच्छी बारिश होती है तो फसलों की स्थिति सुधर सकती है और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव कम रहेगा।

Food Inflation India:  इस बार मानसून की रफ्तार उम्मीद से धीमी रहने की आशंका ने सिर्फ किसानों की ही नहीं, बल्कि आम लोगों की भी चिंता बढ़ा दी है। मौसम की अनिश्चितता का असर अब धीरे-धीरे बाजार पर दिखाई देने की संभावना जताई जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई और अगस्त में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो रोजमर्रा की कई जरूरी खाद्य वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में घर का किचन बजट पहले से ज्यादा प्रभावित हो सकता है।

दूध और डेयरी उत्पादों की कीमतों पर पड़ सकता है असर

कम बारिश का सबसे बड़ा असर पशुओं के लिए उपलब्ध हरे चारे पर पड़ता है। जब चारे की कमी होती है तो पशुपालकों का खर्च बढ़ जाता है, जिससे दूध उत्पादन प्रभावित होने की संभावना रहती है। यदि उत्पादन घटता है तो डेयरी कंपनियां लागत बढ़ने का हवाला देते हुए दूध के दाम बढ़ा सकती हैं। इसके साथ ही दही, घी, पनीर, मक्खन और अन्य डेयरी उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं।

दाल और तिलहन की फसल पर भी बढ़ी चिंता

खरीफ सीजन की कई प्रमुख फसलें मानसून पर निर्भर रहती हैं। समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने की स्थिति में अरहर, उड़द, मूंग जैसी दालों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। वहीं सोयाबीन और अन्य तिलहन फसलों की बुवाई भी धीमी पड़ने की आशंका है। यदि घरेलू उत्पादन कम रहा तो आयात पर निर्भरता बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर खाद्य तेल और दालों की कीमतों पर देखने को मिल सकता है।

सब्जियों की सप्लाई घटने से बढ़ सकते हैं भाव (Food Inflation India)

बारिश कम होने का असर जल्दी खराब होने वाली सब्जियों पर सबसे पहले दिखाई देता है। टमाटर, हरी सब्जियां और दूसरी मौसमी फसलें पर्याप्त पानी नहीं मिलने पर कम उत्पादन देती हैं। इससे मंडियों में आवक घट सकती है और खुदरा बाजार में कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। खासकर शहरों में रहने वाले लोगों को सब्जियों पर पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है।

गेहूं और चावल पर फिलहाल ज्यादा खतरा नहीं

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल गेहूं और चावल जैसी प्रमुख फसलों पर तत्काल बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है। इन फसलों के लिए सिंचाई की बेहतर व्यवस्था और सरकारी भंडार उपलब्ध हैं। हालांकि यदि लंबे समय तक बारिश सामान्य से कम रही तो खाद्य महंगाई का दबाव अन्य कृषि उत्पादों के साथ इन पर भी धीरे-धीरे दिखाई दे सकता है।

सरकार ने शुरू की वैकल्पिक तैयारी

संभावित स्थिति को देखते हुए केंद्र और राज्य स्तर पर कृषि विभागों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी जा रही है। कई राज्यों में वैकल्पिक फसल योजना पर काम शुरू हो चुका है ताकि कम बारिश की स्थिति में उत्पादन पर ज्यादा असर न पड़े और किसानों को नुकसान से बचाया जा सके।

अगले दो महीने तय करेंगे महंगाई की दिशा

विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई और अगस्त का मानसून इस पूरे सीजन की तस्वीर बदल सकता है। यदि इन महीनों में अच्छी बारिश होती है तो फसलों की स्थिति सुधर सकती है और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव कम रहेगा।

लेकिन अगर बारिश सामान्य से कम रही तो दूध, दाल, खाद्य तेल, सब्जियां और अन्य जरूरी सामान की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। ऐसे में आने वाले समय में आम परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका बनी हुई है।

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