Gold Purity Check: त्योहारों का मौसम आते ही बाजार में सोने की ज्वेलरी की मांग बढ़ने लगती है। धनतेरस पर तो बड़ी संख्या में लोग अपनी बचत का पैसा सोने के गहनों और सिक्कों में लगाते हैं। लेकिन महंगी खरीदारी के बीच एक छोटी सी लापरवाही आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है। दरअसल, बाजार में मिलने वाले हर चमकदार गहने की गुणवत्ता एक जैसी नहीं होती। इसलिए खरीदारी करते समय केवल डिजाइन और कीमत पर ध्यान देना काफी नहीं है, बल्कि यह जानना भी जरूरी है कि उसमें वास्तव में कितना सोना मौजूद है।
अच्छी बात यह है कि अब ग्राहकों के पास गहनों की पहचान करने के लिए डिजिटल सुविधा भी उपलब्ध है। BIS के हॉलमार्क और HUID कोड के जरिए ज्वेलरी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की जा सकती है। इसके अलावा कुछ शुरुआती जांच के तरीके भी प्रचलित हैं, लेकिन उनसे सोने की शुद्धता की गारंटी नहीं मिलती।
गहनों पर बना एक छोटा सा कोड बता सकता है उनकी पहचान
सोने की ज्वेलरी खरीदते समय सबसे पहले उस पर हॉलमार्किंग के निशान देखें। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की हॉलमार्किंग व्यवस्था का उद्देश्य ग्राहकों को सोने की गुणवत्ता के बारे में भरोसेमंद जानकारी देना है।
हॉलमार्क वाले आभूषण पर मुख्य रूप से तीन तरह की पहचान होती है। इनमें BIS का लोगो, सोने की शुद्धता बताने वाला फाइननेस मार्क और छह अंकों का HUID कोड शामिल है।
उदाहरण के लिए 22 कैरेट के गहने पर 22K916 और 18 कैरेट की ज्वेलरी पर 18K750 लिखा हो सकता है। इन निशानों की मदद से ग्राहक समझ सकते हैं कि उन्होंने किस शुद्धता का सोना खरीदा है।
24, 22 और 18 कैरेट में कितना होता है असली सोना?
गहने खरीदने से पहले कैरेट का मतलब समझना भी जरूरी है। सोने की शुद्धता को 24 हिस्सों के आधार पर मापा जाता है। इसी से अलग-अलग कैरेट की पहचान होती है।
- 24 कैरेट: लगभग 99.9 प्रतिशत शुद्ध सोना। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से सिक्के और गोल्ड बार बनाने में होता है।
- 22 कैरेट: इसमें लगभग 91.6 प्रतिशत सोना होता है। सामान्य सोने के आभूषणों में इसका इस्तेमाल किया जाता है।
- 18 कैरेट: इसमें 75 प्रतिशत सोना होता है। डायमंड और स्टोन वाली ज्वेलरी में यह काफी प्रचलित है।
- 14 कैरेट: इसमें लगभग 58.5 प्रतिशत सोना मौजूद रहता है।
स्मार्टफोन से ऐसे पता करें गहने की पूरी जानकारी (Gold Purity Check)
अगर आपने हॉलमार्क वाली ज्वेलरी खरीदी है तो उसकी जानकारी जांचने के लिए BIS Care ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आपको किसी दुकान पर जाने की जरूरत नहीं है।
सबसे पहले मोबाइल में BIS Care ऐप इंस्टॉल करें। इसके बाद Verify HUID फीचर खोलें। अब अपने गहने पर दर्ज छह अंकों वाला HUID नंबर डालें। जानकारी सत्यापित होने के बाद संबंधित आभूषण का उपलब्ध हॉलमार्किंग विवरण स्क्रीन पर दिखाई देगा।
यह तरीका खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है जो खरीदारी के समय गहने की गुणवत्ता को लेकर आश्वस्त होना चाहते हैं।
घर पर सोने की जांच के नाम पर बताए जाते हैं ये तरीके
इंटरनेट पर सोने की पहचान के लिए कई घरेलू नुस्खे बताए जाते हैं। इनमें चुंबक, पानी और सिरके से जांच करने जैसी बातें शामिल हैं। हालांकि, इन तरीकों से सोने की वास्तविक शुद्धता प्रमाणित नहीं होती।
चुंबक से जांच: सोना सामान्य रूप से चुंबक की ओर आकर्षित नहीं होता। यदि कोई गहना चुंबक से खिंचता है तो उसमें चुंबकीय धातु होने की संभावना हो सकती है। लेकिन चुंबक से न खिंचना भी असली सोने का प्रमाण नहीं है।
पानी में डालकर देखना: सोने का घनत्व अधिक होता है, लेकिन पानी में गहने का डूबना उसकी शुद्धता तय नहीं करता। इसलिए इस तरीके को अंतिम जांच नहीं मानना चाहिए।
सिरके से जांच: कुछ घरेलू नुस्खों में सिरके की बूंदों से सोने की पहचान करने का दावा किया जाता है। लेकिन इससे कैरेट की सही जानकारी नहीं मिलती और गहने पर प्रयोग करना उचित नहीं है।
रगड़कर जांच करना: गहने को किसी खुरदरी सतह पर रगड़ने से उसकी चमक या सतह खराब हो सकती है। इस तरीके से भी शुद्धता की पुष्टि नहीं होती।
ज्वेलरी एक्सपर्ट किन तकनीकों से करते हैं असली जांच?
सोने की वास्तविक गुणवत्ता जानने के लिए विशेषज्ञ वैज्ञानिक उपकरणों का सहारा लेते हैं। इसमें XRF मशीन एक महत्वपूर्ण तकनीक है। इसके जरिए एक्स-रे की मदद से गहने में मौजूद सोने और दूसरी धातुओं की संरचना का विश्लेषण किया जाता है।
वहीं फायर एसे टेस्ट में नमूने का परीक्षण करके सोने की मात्रा का पता लगाया जाता है। यह काफी सटीक जांच पद्धति मानी जाती है, हालांकि इसमें नमूने का इस्तेमाल होता है।
पुराने गहनों की शुद्धता भी करवा सकते हैं चेक
अगर आपके घर में कई साल पुराने सोने के आभूषण रखे हैं और उन पर हॉलमार्क नहीं है तो भी उनकी गुणवत्ता की जांच करवाई जा सकती है। इसके लिए BIS मान्यता प्राप्त Assaying and Hallmarking Centre से संपर्क किया जा सकता है।
ऐसे केंद्रों पर निर्धारित प्रक्रिया और शुल्क के अनुसार गहनों की जांच की सुविधा उपलब्ध होती है। जांच के बाद ग्राहक को उसकी शुद्धता से संबंधित जानकारी मिल सकती है।
धनतेरस पर सोना खरीदते समय न करें ये गलतियां
सोने की खरीदारी करते समय दुकानदार से हमेशा पक्का बिल लें। बिल में गहने का वजन, कैरेट, सोने की कीमत और मेकिंग चार्ज जैसी जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए। साथ ही HUID कोड की जांच करना न भूलें।
सबसे जरूरी बात यह है कि केवल गहने की चमक, रंग या घरेलू टेस्ट के आधार पर उसकी असलियत का फैसला न करें। आधिकारिक हॉलमार्क और प्रमाणित जांच ही सोने की गुणवत्ता समझने का बेहतर आधार हैं।
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