Gold-Silver Rate: त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में सोना खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए इसकी कीमतों में आई गिरावट चर्चा का विषय बनी हुई है। कुछ समय पहले तक लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा सोना अब नीचे की ओर कारोबार कर रहा है। ऐसे में खरीदारों के मन में सवाल है कि क्या आने वाले दिनों में सोना और सस्ता हो सकता है या फिर मौजूदा भाव के आसपास ही इसकी कीमतें स्थिर हो जाएंगी।
बाजार में गिरावट के बावजूद सोने के भाव को लेकर कोई एक अनुमान सामने नहीं आ रहा है। कुछ जानकार निकट भविष्य में और कमजोरी की आशंका जता रहे हैं, जबकि लंबी अवधि के लिहाज से सोने को समर्थन देने वाले कई कारण अब भी मौजूद हैं।
हाल के दिनों में कितनी बदली सोने की कीमत?
सोने ने इस साल अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में ऊंचे स्तर छुए थे। हालांकि, ऊंचे भाव पर पहुंचने के बाद इसमें गिरावट शुरू हो गई। घरेलू वायदा बाजार में अगस्त के आखिरी सप्ताह के दौरान सोने का भाव 1,64,773 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। इसके बाद कीमत घटकर 1,45,991 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास आ गई।
इस तरह अगस्त के उच्चतम स्तर की तुलना में सोने की कीमत में 11 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने का भाव अपने हालिया शिखर से नीचे आया है। कीमतों में इस बदलाव के कारण अब निवेशक और आभूषण खरीदने वाले लोग बाजार की अगली चाल पर नजर रख रहे हैं।
सोने की चमक फीकी पड़ने के पीछे क्या हैं कारण?
सोने की कीमतों में आई कमजोरी के पीछे कई आर्थिक परिस्थितियां काम कर रही हैं। जब किसी निवेश में तेजी से बढ़ोतरी होती है, तो कुछ निवेशक मुनाफा कमाने के लिए अपनी हिस्सेदारी बेचने लगते हैं। सोने में भी ऊंचे भाव के बाद ऐसा दबाव देखने को मिला।
इसके अलावा अमेरिका में महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता ने बाजार की दिशा को प्रभावित किया है। अमेरिकी सरकारी बॉन्ड से मिलने वाला वास्तविक प्रतिफल बढ़ने पर निवेशकों के लिए सोने की तुलना में दूसरे विकल्प आकर्षक हो सकते हैं। इसकी वजह यह है कि सोना अपने आप में नियमित ब्याज नहीं देता।
डॉलर की मजबूती भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव डाल सकती है। इन कारणों के एक साथ प्रभावी होने से कीमती धातु में गिरावट देखने को मिली है।
Gold-Silver Rate: क्या 1.25 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिर सकता है सोना?
सोने की कीमतों में आगे कितनी गिरावट आएगी, यह कई आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगा। बाजार के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि क्या मौजूदा कमजोरी आगे भी जारी रह सकती है।
विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत और नीचे जाती है, तो घरेलू बाजार में भी इसका असर देखने को मिल सकता है। हालांकि, 1.25 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने के लिए गिरावट का दबाव मौजूदा स्तर से काफी अधिक होना पड़ेगा।
अमेरिका में बॉन्ड प्रतिफल में और बढ़ोतरी तथा महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा रहने जैसी परिस्थितियां सोने के भाव को प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन इस तरह की स्थिति बनेगी ही, ऐसा निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता।
1.34 लाख रुपये तक पहुंचने की आशंका कब बढ़ेगी?
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत अहम समर्थन स्तरों से नीचे फिसलती है, तो इसमें और बड़ी गिरावट की संभावना बन सकती है। बाजार की भाषा में समर्थन स्तर उस कीमत को कहा जाता है, जहां खरीदारी बढ़ने से भाव को सहारा मिलने की उम्मीद रहती है।
कुछ अनुमानों के मुताबिक, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना मौजूदा समर्थन क्षेत्र को तोड़कर और नीचे जाता है, तो भारत में इसकी कीमत लगभग 1.34 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती है। हालांकि, यह संभावित परिस्थिति पर आधारित अनुमान है, न कि सोने की कीमत का तय लक्ष्य।
इसलिए केवल किसी संभावित भाव को देखकर खरीदारी या निवेश का फैसला करना उचित नहीं होगा। बाजार की दिशा समझने के लिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों और आर्थिक संकेतकों पर भी नजर रखना जरूरी है।
क्या सोना 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो सकता है?
सोने के भाव को लेकर सबसे बड़ी चर्चा इसकी कीमत 1 लाख रुपये तक पहुंचने की संभावना पर है। हालांकि, उपलब्ध आकलनों के मुताबिक, फिलहाल इतनी बड़ी गिरावट को कम संभावना वाला परिदृश्य माना जा रहा है।
इस स्तर तक पहुंचने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत में बहुत बड़ी कमी आनी होगी। दूसरी ओर, दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंक सोना खरीदते रहे हैं। वैश्विक तनाव, महंगाई को लेकर चिंताएं और डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिशें भी सोने की मांग को समर्थन दे सकती हैं।
यही वजह है कि निकट भविष्य में कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंका के बावजूद बहुत बड़ी गिरावट को निश्चित मानना सही नहीं होगा।
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