Oil Supply Crisis: दुनिया के ऊपर एक नया संकट मंडराने लगा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के वजह से एनर्जी का सप्लाई फिर से कम होने वाला है। सऊदी अरब के द्वारा ड्रोन हमने किए जाने के बाद एक बार फिर से होर्मुज जल डमरू मध्य को बंद कर दिया गया है। इससे दुनिया के ऊपर खतरा मंडराने लगा है।
इन रास्तों का महत्व इसलिए ज्यादा है क्योंकि इनके जरिए दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक बड़ी मात्रा में तेल और गैस पहुंचती है। अगर इन मार्गों पर लंबे समय तक बाधा बनी रहती है, तो इसका असर सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा। पेट्रोल-डीजल से लेकर एलपीजी, माल ढुलाई और रोजमर्रा की कई चीजों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
क्यों अहम हैं ये तीन रास्ते?
दुनिया के ऊर्जा कारोबार में होर्मुज और बाब अल-मंडेब जैसे समुद्री रास्तों की बड़ी भूमिका है। इनके जरिए खाड़ी क्षेत्र से कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद दुनिया के अलग-अलग बाजारों तक पहुंचते हैं।
वहीं सऊदी अरब की पाइपलाइन व्यवस्था भी तेल को उसके पूर्वी उत्पादन क्षेत्रों से पश्चिमी तट स्थित बंदरगाहों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वहां से टैंकरों के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल भेजा जाता है।
यानी अगर समुद्री रास्तों के साथ-साथ वैकल्पिक पाइपलाइन मार्ग भी प्रभावित होते हैं, तो वैश्विक तेल सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है।
सऊदी की पाइपलाइन बंद होने से क्या बदलेगा?
ड्रोन हमलों के बाद सऊदी अरब द्वारा कच्चे तेल की एक प्रमुख पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद करने की खबर ने बाजार की चिंता बढ़ाई है। यह पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से से तेल को पश्चिम की ओर यानबू बंदरगाह तक पहुंचाने में मदद करती है।
यानबू से तेल को समुद्री रास्ते के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भेजा जाता है। इस रूट के बाधित होने से यूरोप समेत कुछ अन्य बाजारों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
भारत के लिए इसका सीधा असर सीमित हो सकता है, लेकिन समस्या तब बड़ी बन सकती है जब पहले से प्रभावित होर्मुज मार्ग के साथ दूसरे वैकल्पिक रास्तों पर भी लंबे समय तक व्यवधान बना रहे।
बाब अल-मंडेब क्यों है भारत के लिए महत्वपूर्ण?
बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। यह यूरोप और एशिया के बीच समुद्री व्यापार के लिए भी बेहद अहम मार्ग है।
यमन में हूती विद्रोहियों की गतिविधियों के कारण इस समुद्री मार्ग को लेकर पहले भी सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आती रही हैं। अगर इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही बड़े स्तर पर प्रभावित होती है, तो तेल के साथ-साथ दूसरे सामान की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है।
भारत के लिए यह रास्ता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिम एशिया से आने वाले ऊर्जा उत्पादों और यूरोप की ओर जाने वाले कई समुद्री व्यापार मार्गों में इसकी भूमिका है।
भारत में पेट्रोल-डीजल और LPG पर क्या असर पड़ सकता है?
अगर तेल की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहती है, तो कच्चे तेल की कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बन सकता है। इसका असर आगे चलकर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों पर पड़ सकता है।इसके अलावा महंगा कच्चा तेल परिवहन लागत को भी बढ़ा सकता है। इससे एक जगह से दूसरी जगह सामान पहुंचाने का खर्च बढ़ेगा और महंगाई पर दबाव आ सकता है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि भारत में तुरंत पेट्रोल-डीजल या एलपीजी की कीमतों में बड़ा उछाल तय है। वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि सप्लाई में व्यवधान कितना लंबा चलता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें किस स्तर पर रहती हैं।
तेल महंगा हुआ तो शेयर बाजार पर भी असर (Oil Supply Crisis)
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है। महंगा ईंधन कंपनियों की उत्पादन और परिवहन लागत बढ़ा सकता है। इससे कुछ कंपनियों के मुनाफे पर दबाव आ सकता है।
दूसरी ओर, अगर महंगाई बढ़ती है और लोगों की खरीदारी क्षमता प्रभावित होती है, तो अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर भी असर पड़ सकता है।फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यही है कि पश्चिम एशिया में तनाव कितना लंबा चलता है और इन महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों पर स्थिति कब तक सामान्य होती है।

