RBI Loan Rules: RBI का नया लोन नियम, ब्याज और EMI का बदलेगा हिसाब

RBI Loan Rules: RBI ने MCLR की गणना को एक समान करने का सुझाव दिया है। प्रस्तावित मॉडल में नए डिपॉजिट और उधारी की मार्जिनल कॉस्ट के तीन महीने के मूविंग एवरेज को आधार बनाने की बात कही गई है।

RBI Loan Rules: भारतीय रिजर्व बैंक ने लोन की ब्याज दर तय करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और एकरूप बनाने के लिए नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया है। इसका असर बैंक और NBFC से कर्ज लेने वाले ग्राहकों पर पड़ सकता है। नए प्रस्ताव में लोन की ब्याज दर, बेंचमार्क, स्प्रेड और फ्लोटिंग रेट के रीसेट से जुड़े नियमों को स्पष्ट करने पर जोर दिया गया है।

लोन की ब्याज दर कैसे तय होगी?

प्रस्तावित व्यवस्था में लोन की कीमत को एक बेंचमार्क रेट और निर्धारित स्प्रेड से जोड़ने की बात कही गई है। स्प्रेड तय करने के लिए बैंक या NBFC को बोर्ड से मंजूर स्पष्ट नीति अपनानी होगी। इससे ग्राहक यह समझ सकेंगे कि उन्हें मिलने वाली ब्याज दर किन आधारों पर तय की गई है।

फ्लोटिंग रेट वाले ग्राहकों के लिए अहम बदलाव

फ्लोटिंग रेट वाले कुछ लोन में बाहरी बेंचमार्क से लिंकिंग की व्यवस्था जारी रखने का प्रस्ताव है। वहीं ब्याज दर में बदलाव कितने अंतराल पर किया जाएगा, इसे लेकर भी स्पष्ट सीमा तय करने की बात सामने आई है। प्रस्ताव के मुताबिक रीसेट अवधि अधिकतम तीन महीने तक रखी जा सकती है।

MCLR की गणना में भी बदलाव का प्रस्ताव

RBI ने MCLR की गणना को एक समान करने का सुझाव दिया है। प्रस्तावित मॉडल में नए डिपॉजिट और उधारी की मार्जिनल कॉस्ट के तीन महीने के मूविंग एवरेज को आधार बनाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य अलग-अलग संस्थानों में ब्याज दर तय करने की प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित बनाना है।

ब्याज की गणना का तरीका होगा ज्यादा स्पष्ट

नए प्रस्ताव में ब्याज की गणना के तरीके को भी मानकीकृत करने पर जोर दिया गया है। ब्याज डेली रिड्यूसिंग बैलेंस के आधार पर निकालने और वास्तविक दिनों के आधार पर डे-काउंट कन्वेंशन अपनाने का प्रस्ताव है। साथ ही मासिक रेस्ट के इस्तेमाल को लेकर भी एक समान व्यवस्था लाने की बात कही गई है।

छोटे लोन पर APR की सीमा का प्रस्ताव (RBI Loan Rules)

माइक्रोफाइनेंस और छोटे मूल्य वाले कुछ रिटेल लोन के लिए APR यानी सालाना प्रतिशत दर की अधिकतम सीमा तय करने का प्रस्ताव भी महत्वपूर्ण है। इससे छोटे कर्ज पर बहुत अधिक लागत वसूलने की गुंजाइश सीमित हो सकती है। हालांकि, छोटे टिकट वाले ज्यादा ब्याज वाले लोन पर निर्भर कुछ लेंडर्स के मार्जिन पर इसका दबाव पड़ने की संभावना है।

ग्राहकों के लिए क्या बदलेगा?

अगर यह प्रस्ताव अंतिम नियम के रूप में लागू होता है, तो लोन लेने वाले ग्राहकों को ब्याज दर की संरचना समझने में आसानी हो सकती है। खासकर फ्लोटिंग रेट लोन में बेंचमार्क और स्प्रेड की जानकारी स्पष्ट होने से ग्राहक अपने कर्ज की लागत को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे। हालांकि, वास्तविक EMI में बदलाव हर ग्राहक के लोन, ब्याज दर, बकाया राशि और रीसेट के समय पर निर्भर करेगा।

 

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