Success Story: पिता की हत्या के बाद मिले तानों, फिर अफसर बनने की ठानी; UPPSC में 62वीं रैंक लाकर बनीं अफसर 

Success Story: आयुषी सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। जिस उम्र में उनके सपने आकार ले रहे थे, उसी दौरान एक ऐसी घटना हुई जिसने उनके परिवार को भीतर तक झकझोर दिया। पिता की हत्या के बाद उन्हें सिर्फ दुख ही नहीं झेलना पड़ा, बल्कि समाज के ताने भी सुनने पड़े।

Success Story: किस्मत जब किसी से उसका सबसे मजबूत सहारा छीन लेती है, तो जिंदगी मुश्किल जरूर हो जाती है, लेकिन कुछ लोग उसी दर्द को अपनी ताकत बना लेते हैं। आयुषी सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। जिस उम्र में उनके सपने आकार ले रहे थे, उसी दौरान एक ऐसी घटना हुई जिसने उनके परिवार को भीतर तक झकझोर दिया। पिता की हत्या के बाद उन्हें सिर्फ दुख ही नहीं झेलना पड़ा, बल्कि समाज के ताने भी सुनने पड़े।

लोगों ने उनकी पहचान तक पर सवाल उठाए और उन्हें ‘क्रिमिनल की बेटी’ कहकर नीचा दिखाने की कोशिश की। लेकिन आयुषी ने इन बातों के सामने हार मानने के बजाय अपने पिता के सपने को अपनी जिंदगी का लक्ष्य बना लिया। लगातार मेहनत और असफलताओं से सीखते हुए उन्होंने UPPSC परीक्षा पास की और 62वीं रैंक हासिल कर DSP का पद प्राप्त किया।

पिता चाहते थे बेटी बने सरकारी अधिकारी

आयुषी पढ़ाई में शुरू से ही अच्छी थीं। उनके पिता योगेंद्र सिंह चाहते थे कि उनकी बेटी पढ़-लिखकर एक जिम्मेदार सरकारी अधिकारी बने। पिता का यह सपना आयुषी के लिए भी धीरे-धीरे उनका अपना सपना बन गया था।

लेकिन वर्ष 2015 में परिवार पर ऐसी आफत आई जिसने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी।

2015 में पिता की कोर्ट परिसर में हत्या (Success Story)

23 फरवरी 2015 का दिन आयुषी के परिवार के लिए बेहद दर्दनाक साबित हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट परिसर में उनके पिता की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

पिता को खोने का सदमा आयुषी के लिए बहुत बड़ा था। इसके साथ ही उन्हें आसपास के लोगों की बातें भी परेशान करने लगीं। कुछ लोगों ने उनके परिवार को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं और आयुषी को भी ताने सुनने पड़े।

लेकिन इन बातों ने उन्हें तोड़ने के बजाय अपने जीवन का लक्ष्य और स्पष्ट करने के लिए मजबूर किया।

लोगों के तानों को बनाया अपनी ताकत

आयुषी ने तय किया कि वह अपने पिता का सपना पूरा करेंगी। वह पढ़ाई में जुट गईं और आगे की शिक्षा के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय पहुंचीं।

उनके सामने सिर्फ सरकारी नौकरी हासिल करने का लक्ष्य नहीं था। वह खुद को इस मुकाम तक पहुंचाना चाहती थीं जहां उनकी पहचान किसी के परिवार या लगाए गए आरोपों से नहीं, बल्कि उनकी अपनी मेहनत और उपलब्धि से हो।

पहले प्रयास में मिली असफलता, लेकिन नहीं मानी हार

सिविल सेवा की तैयारी का रास्ता आसान नहीं था। आयुषी को भी परीक्षा की तैयारी के दौरान असफलता का सामना करना पड़ा। शुरुआती प्रयास में प्रीलिम्स में सफलता नहीं मिली।

कई उम्मीदवार ऐसी स्थिति में तैयारी छोड़ देते हैं, लेकिन आयुषी ने अपनी रणनीति पर दोबारा काम किया और आगे बढ़ती रहीं। परिवार, खासकर भाई के सहयोग ने भी उन्हें हिम्मत दी।

उन्होंने अलग-अलग सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी और आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई।

UPPSC में 62वीं रैंक, हासिल किया DSP का पद

आयुषी की मेहनत को बड़ी सफलता तब मिली जब UPPSC 2022 का परिणाम सामने आया। अप्रैल 2023 में घोषित परिणाम में उन्होंने 62वीं रैंक हासिल की।

इस सफलता के साथ उनका चयन पुलिस उपाधीक्षक यानी DSP के पद के लिए हुआ।

यह उपलब्धि सिर्फ एक सरकारी नौकरी हासिल करने की कहानी नहीं थी। यह उन तमाम परिस्थितियों के खिलाफ उनका जवाब भी थी, जिनमें लोगों ने कभी उनकी क्षमता पर सवाल उठाए थे।

पिता का सपना पूरा कर हासिल की अपनी पहचान

पिता के जाने के बाद आयुषी ने जिस लक्ष्य को पकड़ा, उसे आखिरकार हासिल कर लिया। मुश्किल परिस्थितियों, सामाजिक तानों और शुरुआती असफलता के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई और लक्ष्य से समझौता नहीं किया।

उनकी कहानी यही बताती है कि परिस्थितियां इंसान के रास्ते को कठिन बना सकती हैं, लेकिन मंजिल तय करने का हक आखिरकार उसी के हाथ में होता है। आयुषी ने अपने दर्द को कमजोरी नहीं बनने दिया और उसी को सफलता की वजह बना दिया।

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