Cancer Causes: कैंसर को लेकर आमतौर पर खानपान, जीवनशैली और आनुवंशिक कारणों की चर्चा होती है, लेकिन कुछ संक्रमण भी लंबे समय में कैंसर का जोखिम बढ़ा सकते हैं। भारत से जुड़े आंकड़ों में सामने आया है कि हर साल बड़ी संख्या में कैंसर के मामले ऐसे संक्रमणों से संबंधित हो सकते हैं, जिन्हें समय रहते रोकना या नियंत्रित करना संभव है।
कुछ संक्रमण लंबे समय तक शरीर में बने रहते हैं
हर संक्रमण कैंसर का कारण नहीं बनता। चिंता उन संक्रमणों को लेकर है जो शरीर में लंबे समय तक बने रह सकते हैं और लगातार कोशिकाओं पर असर डालते हैं। समय के साथ होने वाले ऐसे बदलाव कुछ लोगों में कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसी वजह से संक्रमण की पहचान और उसका उचित इलाज महत्वपूर्ण माना जाता है।
महिलाओं में इस वायरस से जुड़ा है सर्वाइकल कैंसर
मानव पेपिलोमा वायरस यानी एचपीवी को सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख संक्रमण संबंधी कारणों में गिना जाता है। यह संक्रमण काफी आम हो सकता है और कई मामलों में शरीर इसे खुद नियंत्रित कर लेता है। हालांकि, संक्रमण लंबे समय तक बना रहने पर खतरा बढ़ सकता है। इसी कारण चिकित्सकीय सलाह के अनुसार टीकाकरण और जरूरी जांच को अहम माना जाता है।
पेट और लिवर से जुड़े कैंसर में भी संक्रमण की भूमिका
कुछ बैक्टीरिया और वायरस पेट तथा लिवर से संबंधित कैंसर के जोखिम से भी जुड़े पाए गए हैं। हेलिकोबैक्टर पायलोरी नाम का बैक्टीरिया पेट में लंबे समय तक मौजूद रह सकता है और पेट की अंदरूनी परत में परेशानी पैदा कर सकता है। इसी तरह हेपेटाइटिस बी और सी जैसे वायरस लिवर को प्रभावित करते हैं और लंबे समय तक रहने वाला संक्रमण गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ा सकता है।
बचाव के लिए टीका और समय पर जांच जरूरी (Cancer Causes)
संक्रमण से जुड़े कैंसर के मामले में बचाव की गुंजाइश मौजूद है। एचपीवी और हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए उपलब्ध टीकों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार लिया जा सकता है। इसके अलावा जरूरत के हिसाब से स्वास्थ्य जांच कराना भी महत्वपूर्ण है। लंबे समय से पेट की परेशानी, असामान्य लक्षण या किसी संक्रमण की समस्या बनी हुई है तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।
एक जरूरी बात: हर संक्रमण का मतलब कैंसर नहीं
किसी व्यक्ति को संक्रमण होने का अर्थ यह नहीं है कि उसे कैंसर हो जाएगा। कैंसर का खतरा कई अलग-अलग कारकों पर निर्भर करता है। इसलिए किसी रिपोर्ट या आंकड़े को देखकर घबराने के बजाय डॉक्टर से सही सलाह लेना और जरूरी बचाव के कदम उठाना अधिक समझदारी है।

