Hydrogen Train India: 5 रुपये से शुरू होगा सफर, बिना धुआं छोड़े दौड़ेगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन

Hydrogen Train India:भारतीय रेलवे ने हरित परिवहन की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन की शुरुआत कर दी है। हरियाणा के जींद से शुरू हुई यह ट्रेन प्रदूषण मुक्त तकनीक पर आधारित है और इसका संचालन ऐसे समय में शुरू किया गया है, जब दुनिया स्वच्छ ऊर्जा वाले परिवहन को बढ़ावा दे रही है।

Hydrogen Train India:भारतीय रेलवे ने हरित परिवहन की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन की शुरुआत कर दी है। हरियाणा के जींद से शुरू हुई यह ट्रेन प्रदूषण मुक्त तकनीक पर आधारित है और इसका संचालन ऐसे समय में शुरू किया गया है, जब दुनिया स्वच्छ ऊर्जा वाले परिवहन को बढ़ावा दे रही है। खास बात यह है कि इस ट्रेन का किराया महज 5 रुपये से शुरू होता है, जिससे आम यात्रियों को भी कम खर्च में आधुनिक सफर का विकल्प मिलेगा।

हाइड्रोजन ट्रेन क्यों मानी जा रही है गेम चेंजर?

अब तक भारतीय रेलवे में डीजल और बिजली से चलने वाली ट्रेनें ही प्रमुख थीं, लेकिन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक नई शुरुआत मानी जा रही है। इसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली तैयार होती है, जो ट्रेन को चलाती है। इस दौरान कार्बन उत्सर्जन नहीं होता और केवल पानी की भाप निकलती है। यही वजह है कि इसे पर्यावरण के लिए सुरक्षित परिवहन माना जा रहा है।

जींद से सोनीपत के बीच शुरू हुआ संचालन

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन फिलहाल हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच चलाई जा रही है। लगभग 89 किलोमीटर लंबे इस रूट पर ट्रेन प्रतिदिन दो राउंड ट्रिप करेगी। रास्ते में कई प्रमुख स्टेशनों पर इसका ठहराव रखा गया है, ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को इसका लाभ मिल सके।

किराया इतना कम कि हर कोई कर सके सफर

इस ट्रेन का किराया 5 रुपये से 25 रुपये के बीच रखा गया है। यानी कई रूटों पर यात्रा का खर्च प्लेटफॉर्म टिकट के बराबर या उससे भी कम हो सकता है। रेलवे का उद्देश्य आधुनिक तकनीक को आम लोगों की पहुंच तक लाना है।

रफ्तार और क्षमता दोनों में दमदार

हाइड्रोजन ट्रेन की परिचालन गति लगभग 75 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि परीक्षण के दौरान इसने 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक की रफ्तार हासिल की। इसमें कुल 10 कोच हैं, जिनमें 8 यात्री कोच और 2 ड्राइविंग पावर कार शामिल हैं। ट्रेन में 682 सीटें उपलब्ध हैं और कुल मिलाकर करीब 2,600 यात्रियों को ले जाने की क्षमता है।

एक बार फ्यूल भरने पर कितनी दूर जाएगी?

रेलवे के मुताबिक, एक बार हाइड्रोजन भरने के बाद यह ट्रेन करीब 250 किलोमीटर तक चल सकती है। इसके लिए जींद में आधुनिक हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन तैयार किया गया है, जहां सुरक्षित तरीके से गैस स्टोर और भरी जाती है।

सुरक्षा के लिए लगाए गए एडवांस सिस्टम

हाइड्रोजन तकनीक को देखते हुए ट्रेन और रिफ्यूलिंग स्टेशन में मल्टी-लेयर सुरक्षा व्यवस्था की गई है। इसमें हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर, फायर डिटेक्टर, फ्लेम सेंसर, ऑटो शटडाउन सिस्टम और लगातार निगरानी करने वाले मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

कम शोर, स्वच्छ सफर और भविष्य की तकनीक

हाइड्रोजन ट्रेन पारंपरिक डीजल ट्रेनों की तुलना में कम शोर करती है और धुएं का उत्सर्जन नहीं करती। इससे वायु प्रदूषण कम होगा और डीजल पर निर्भरता भी घटेगी। यही कारण है कि दुनिया के कई देशों की तरह भारत भी अब स्वच्छ ऊर्जा आधारित रेलवे नेटवर्क की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

आगे क्या है रेलवे की योजना?

रेल मंत्रालय की योजना ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ परियोजना के तहत आने वाले समय में अन्य उपयुक्त रेल मार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन शुरू करने की है। इससे गैर-विद्युतीकृत रूटों पर भी पर्यावरण अनुकूल रेल सेवा उपलब्ध कराई जा सकेगी और देश के रेल नेटवर्क को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा सकेगा।

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