BPSC Success Story: सफलता का रास्ता कभी आसान नहीं होता। इसका सबसे प्रेरणादायक उदाहरण हैं प्रज्ञा सचान, जिन्होंने तमाम कठिनाइयों के बावजूद BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 453वीं रैंक हासिल की। अब उन्हें बिहार प्रशासनिक सेवा में BDO (प्रखंड विकास पदाधिकारी) का पद मिलेगा। उनकी कहानी हर उस अभ्यर्थी के लिए प्रेरणा है, जो संघर्षों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखता है।
2017 से शुरू हुआ सिविल सेवा का सफर
प्रज्ञा सचान ने सिविल सेवा का सपना लेकर 2017 में तैयारी शुरू की। शुरुआती दौर में उन्हें कई असफलताओं का सामना करना पड़ा। पहली बार UPSC की प्रारंभिक परीक्षा भी पास नहीं कर सकीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी जारी रखी।
UPPCS में मिली सफलता, लेकिन मनचाही मंजिल नहीं
UPSC के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPCS) की तैयारी शुरू की। 2018 में प्रीलिम्स परीक्षा पास कर ली, लेकिन मुख्य परीक्षा के पैटर्न में बदलाव ने उनकी तैयारी को प्रभावित किया। इसके बावजूद उन्होंने लगातार प्रयास जारी रखा और आखिरकार 2021 में नायब तहसीलदार के पद पर चयनित हुईं। हालांकि उनका सपना SDM बनने का था, इसलिए उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी।
बीमारी ने रोका, लेकिन हौसला नहीं टूटा
तैयारी के दौरान प्रज्ञा एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ गईं। लंबे समय तक बुखार और इलाज के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। बीमारी के बीच ही उन्होंने इंटरव्यू की तैयारी की, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। यह दौर उनके जीवन की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक था।
शादी, मातृत्व और फिर नई चुनौती
समय के साथ उनकी शादी हुई और वे मां बनीं। लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने अपने सपने को पीछे नहीं छोड़ा। नवजात बेटी की देखभाल के साथ-साथ उन्होंने फिर से UPSC, UPPCS और BPSC की तैयारियां शुरू कर दीं।
C-Section के सिर्फ 25 दिन बाद दी BPSC परीक्षा
प्रज्ञा की संघर्ष गाथा का सबसे भावुक अध्याय तब सामने आया, जब उन्होंने C-Section से बेटी को जन्म देने के केवल 25 दिन बाद BPSC की परीक्षा दी। ऑपरेशन के दर्द, शारीरिक कमजोरी और नवजात की जिम्मेदारी के बावजूद उन्होंने परीक्षा केंद्र पहुंचकर अपना सपना अधूरा नहीं छोड़ा। रातों में बच्ची को संभालते हुए पढ़ाई करना उनकी दिनचर्या बन गई थी।
आखिरकार मेहनत लाई रंग
लगातार कई वर्षों की मेहनत, असफलताओं और कठिन परिस्थितियों के बाद BPSC 70वीं परीक्षा में प्रज्ञा सचान ने 453वीं रैंक हासिल कर सफलता का नया अध्याय लिख दिया। इस उपलब्धि के साथ वे अपने परिवार की पहली सदस्य बन गई हैं, जिन्होंने सिविल सेवा में जगह बनाई है।
संघर्ष से सीख
प्रज्ञा सचान की कहानी बताती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे तो सफलता जरूर मिलती है। धैर्य, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास ही किसी भी बड़े सपने को हकीकत में बदलने की सबसे बड़ी ताकत हैं।
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