BPSC Success Story: हर साल लाखों युवा BPSC परीक्षा पास कर अफसर बनने का सपना देखते हैं, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो संघर्ष की नई मिसाल बन जाती हैं। बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले राजू कुमार ने रेलवे में 12 घंटे की नौकरी करते हुए बिना किसी कोचिंग के तैयारी की और 70वीं BPSC परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर DSP बनने का सपना पूरा कर लिया।
12 साल की उम्र में बदली जिंदगी
राजू कुमार का बचपन आसान नहीं था। महज 12 साल की उम्र में पिता का निधन हो गया, जिसके बाद परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी बढ़ गई। सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई जारी रखना चुनौती थी, लेकिन उन्होंने हालात के आगे हार नहीं मानी। मां ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
रेलवे की नौकरी मिली, लेकिन सपना अफसर बनने का था
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान राजू का चयन भारतीय रेलवे में ग्रुप-डी के प्वाइंट्समैन पद पर हुआ। उनकी ड्यूटी रेलवे फाटक और ट्रैक संचालन से जुड़ी थी, जिसमें रोजाना करीब 12 घंटे काम करना पड़ता था। नौकरी मिलने के बाद भी उन्होंने अपने बड़े लक्ष्य को नहीं छोड़ा।
ड्यूटी खत्म होते ही शुरू हो जाती थी पढ़ाई
दिनभर की थकान के बावजूद राजू रोज पढ़ाई के लिए समय निकालते थे। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि महंगी कोचिंग का सहारा ले सकें, इसलिए उन्होंने सेल्फ स्टडी को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। सिलेबस की गहरी समझ, नियमित अभ्यास और अनुशासन के दम पर उन्होंने अपनी तैयारी को मजबूत किया।
बिना कोचिंग हासिल की 72वीं रैंक
लगातार मेहनत का नतीजा 70वीं BPSC परीक्षा में देखने को मिला। राजू कुमार ने 72वीं रैंक हासिल की और उनका चयन डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) पद के लिए हो गया। यह सफलता उन युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को छोटा मान लेते हैं।
सफलता का श्रेय मां और परिवार को दिया
DSP बनने के बाद राजू ने अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपनी मां और परिवार को दिया। उनका कहना है कि कठिन समय में परिवार का विश्वास और खुद पर भरोसा ही उन्हें आगे बढ़ाता रहा।
युवाओं के लिए राजू का संदेश
राजू कुमार का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए महंगी कोचिंग नहीं, बल्कि सही रणनीति, अनुशासन और निरंतर मेहनत जरूरी है। उनका संदेश है कि लक्ष्य स्पष्ट रखें, रोज थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ें और असफलताओं से घबराए बिना प्रयास जारी रखें।
“हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सफलता एक दिन जरूर मिलती है।”
क्यों खास है राजू कुमार की कहानी?
आज जब कई युवा सुविधाओं की कमी को अपनी तैयारी में बाधा मानते हैं, वहीं राजू कुमार ने यह साबित किया कि मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास किसी भी चुनौती से बड़े होते हैं। रेलवे की नौकरी से लेकर DSP बनने तक का उनका सफर लाखों अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
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