Abhijeet Deepke : नीट पेपर लीक विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने देशभर में नई बहस छेड़ दी है। इस घटनाक्रम के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे अभिजीत दीपके के माता-पिता की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने इसे छात्रों के धैर्य, संघर्ष और लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई आवाज का परिणाम बताया है।
‘यह छात्रों की जीत है’, पिता ने जताया आभार
अभिजीत दीपके के पिता भगवान शंकर दीपके ने कहा कि लंबे समय से छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे थे। उनका कहना है कि सरकार ने आखिरकार छात्रों की भावनाओं को समझा और बड़ा फैसला लिया। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान का भी धन्यवाद करते हुए कहा कि पद छोड़ने का निर्णय आसान नहीं होता और इस कदम ने लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश दिया है।
मां बोलीं- ढाई महीने की चिंता के बाद मिली राहत
अभिजीत की मां अनीता दीपके ने कहा कि पिछले ढाई महीने पूरे परिवार के लिए बेहद तनावपूर्ण रहे। आंदोलन के दौरान बेटे की सुरक्षा और लगातार बढ़ते दबाव को लेकर परिवार चिंतित था। उन्होंने कहा कि अब ऐसा महसूस हो रहा है कि छात्रों की मेहनत और धैर्य का सम्मान हुआ है। उनके मुताबिक, यह सिर्फ एक परिवार की नहीं बल्कि उन हजारों छात्रों की जीत है, जिन्होंने अपनी आवाज बुलंद की।
संघर्ष के दौरान बेटे का हर कदम करीब से देखा (Abhijeet Deepke)
दीपके परिवार का कहना है कि अभिजीत ने पूरे आंदोलन के दौरान कई मुश्किलों का सामना किया, लेकिन उसने पीछे हटने के बजाय छात्रों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। शुरुआत में परिवार को उसके फैसलों को लेकर चिंता जरूर थी, लेकिन समय के साथ उन्हें विश्वास हो गया कि वह व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि छात्रों के भविष्य के लिए आवाज उठा रहा है।
परिवार का राजनीति से नहीं रहा कोई संबंध
भगवान शंकर दीपके ने बताया कि उनके परिवार का कभी सक्रिय राजनीति से कोई नाता नहीं रहा। उनका सपना था कि बेटा सिविल सेवा में जाकर देश की सेवा करे। हालांकि अभिजीत ने अपनी अलग राह चुनी और सामाजिक व छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई। परिवार का कहना है कि उसका उद्देश्य हमेशा युवाओं की समस्याओं को सामने लाना रहा है।
इंजीनियरिंग छोड़ी, पत्रकारिता में बनाई पहचान
अभिजीत दीपके ने पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की थी, लेकिन उनकी रुचि पत्रकारिता और जनसंचार के क्षेत्र में थी। इसके बाद उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की और आगे चलकर पब्लिक रिलेशंस की उच्च शिक्षा भी हासिल की। छात्र आंदोलनों और सामाजिक मुद्दों पर सक्रियता के कारण वह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए।
अब आगे क्या?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नीट पेपर लीक मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और छात्रों की अन्य मांगों पर सरकार क्या फैसला लेती है। फिलहाल, अभिजीत दीपके के परिवार का मानना है कि यह घटनाक्रम लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई आवाज की अहम मिसाल बनकर सामने आया है।

