Indoor Air Pollution: घर में इस्तेमाल होने वाली ये 6 चीजें बढ़ा सकती हैं खांसी और सांस की परेशानी, आज ही बरतें सावधानी

Indoor Air Pollution: घर में इस्तेमाल होने वाले परफ्यूम, रूम फ्रेशनर, मच्छर भगाने वाली कॉइल और क्लीनिंग प्रोडक्ट्स से इनडोर एयर क्वालिटी प्रभावित हो सकती है। जानें इनसे बचने के आसान तरीके।

Indoor Air Pollution:  खांसी, गले में खराश या सांस लेने में परेशानी होने पर अक्सर लोग बाहर के प्रदूषण को इसका कारण मानते हैं। सड़क की धूल, गाड़ियों का धुआं और खराब हवा सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं, लेकिन घर के अंदर की हवा भी पूरी तरह सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं है।

हम रोजमर्रा की जिंदगी में कई ऐसी चीजों का इस्तेमाल करते हैं, जिनसे निकलने वाली गंध, धुआं या छोटे कण सांस की नली में जलन पैदा कर सकते हैं। परफ्यूम, रूम फ्रेशनर, मच्छर भगाने वाली कॉइल और सफाई में इस्तेमाल होने वाले कुछ केमिकल इसके उदाहरण हैं। खासकर अस्थमा और एलर्जी से परेशान लोगों को इनसे ज्यादा दिक्कत हो सकती है।

आइए जानते हैं घर में इस्तेमाल होने वाली किन चीजों से सांस संबंधी परेशानी बढ़ सकती है और उनसे बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।

1. परफ्यूम और बॉडी स्प्रे का ज्यादा इस्तेमाल

घर से बाहर निकलते समय परफ्यूम या बॉडी स्प्रे लगाना कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा है। लेकिन तेज खुशबू वाले इन उत्पादों से निकलने वाले रसायन कुछ लोगों की सांस की नली में जलन पैदा कर सकते हैं। बंद कमरे में बार-बार स्प्रे करने से परेशानी बढ़ सकती है।

संवेदनशील लोगों को इसके संपर्क में आने पर खांसी, गले में खराश, सिरदर्द या सांस लेने में परेशानी महसूस हो सकती है। अस्थमा के मरीजों में तेज खुशबू लक्षणों को बढ़ा सकती है।

क्या करें: परफ्यूम का इस्तेमाल सीमित मात्रा में करें। इसे बंद कमरे में छिड़कने से बचें और किसी उत्पाद से परेशानी होने पर उसका इस्तेमाल बंद कर दें।

2. रूम फ्रेशनर और खुशबूदार मोमबत्तियां

कमरे से बदबू दूर करने के लिए लोग अक्सर रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, कुछ लोग घर को महकाने के लिए सुगंधित मोमबत्तियां जलाते हैं। हालांकि, इनसे निकलने वाली खुशबू और हवा में फैलने वाले कुछ रसायन संवेदनशील लोगों को परेशान कर सकते हैं।

मोमबत्तियां जलने के दौरान धुआं और सूक्ष्म कण भी निकल सकते हैं। बंद जगह में इनका इस्तेमाल करने से घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

क्या करें: बदबू दूर करने के लिए केवल उसे खुशबू से ढकने के बजाय उसका कारण पता करें। कूड़ेदान साफ रखें, नमी वाली जगहों को सूखने दें और मौसम अनुकूल होने पर खिड़कियां खोलकर हवा आने-जाने का रास्ता बनाएं।

3. मच्छर भगाने वाली कॉइल और लिक्विड रेपेलेंट

मच्छरों से बचने के लिए कई घरों में कॉइल और इलेक्ट्रिक लिक्विड रेपेलेंट का इस्तेमाल किया जाता है। मच्छरों से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए यह जरूरी भी है, लेकिन इन उत्पादों का इस्तेमाल निर्देशों के अनुसार करना चाहिए।

मच्छर भगाने वाली कॉइल जलने से धुआं और सूक्ष्म कण निकलते हैं, जो सांस की नली में जलन पैदा कर सकते हैं। वहीं, लिक्विड रेपेलेंट से निकलने वाली गंध भी कुछ लोगों को परेशान कर सकती है। बंद और कम हवादार कमरे में इनका इस्तेमाल करने से परेशानी बढ़ सकती है।

क्या करें: उत्पाद के पैकेट पर दिए गए निर्देशों का पालन करें। मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी और खिड़कियों पर जाली जैसे विकल्प भी अपनाएं। कॉइल को सोते समय अपने सिर के पास या बंद कमरे में जलाने से बचें।

4. अगरबत्ती और धूपबत्ती का धुआं

भारतीय घरों में पूजा-पाठ के दौरान अगरबत्ती और धूपबत्ती जलाने की परंपरा है। हालांकि, इनके जलने से निकलने वाला धुआं हवा में सूक्ष्म कण और अन्य प्रदूषक छोड़ सकता है। लगातार या ज्यादा धुएं के संपर्क में रहने से कुछ लोगों को खांसी, छींक और सांस लेने में परेशानी हो सकती है।

बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा या सांस संबंधी बीमारी से परेशान लोगों को धुएं के प्रति विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

क्या करें: अगरबत्ती और धूपबत्ती का इस्तेमाल सीमित रखें। इन्हें जलाते समय पर्याप्त हवा आने-जाने की व्यवस्था करें और धुएं को सीधे सांस में लेने से बचें।

5. फिनाइल, ब्लीच और बाथरूम क्लीनर

घर की सफाई में इस्तेमाल होने वाले फ्लोर क्लीनर, ब्लीच और टॉयलेट क्लीनर की तेज गंध कई बार आंखों और गले में जलन पैदा कर सकती है। कम हवादार बाथरूम में इन उत्पादों का इस्तेमाल करने से सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है।

सफाई के उत्पादों को मिलाकर इस्तेमाल करना खास तौर पर खतरनाक हो सकता है। उदाहरण के लिए, ब्लीच को एसिड वाले टॉयलेट क्लीनर या अमोनिया युक्त उत्पादों के साथ मिलाने से जहरीली गैस निकल सकती है।

क्या करें: सफाई के दौरान खिड़की या एग्जॉस्ट फैन से वेंटिलेशन बनाए रखें। उत्पाद के लेबल पर दिए गए निर्देशों का पालन करें और किसी भी दो क्लीनर को आपस में न मिलाएं।

6. घर में धूल और नमी को नजरअंदाज करना

सांस की परेशानी का कारण केवल खुशबूदार उत्पाद नहीं हैं। घर में जमा धूल, धूल के कण, फफूंद और नमी भी एलर्जी या अस्थमा के लक्षण बढ़ा सकते हैं। खासकर बिस्तर, पर्दे, कालीन और लंबे समय तक बंद रहने वाले कमरों में धूल जमा हो सकती है।

दीवारों पर फफूंद या लगातार सीलन रहने से भी घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए नियमित सफाई के साथ नमी की समस्या को दूर करना जरूरी है।

क्या करें: घर की नियमित सफाई करें, सीलन का कारण दूर करें और बिस्तर व पर्दों को समय-समय पर साफ करें। सफाई करते समय धूल उड़ने से बचाने के लिए गीले कपड़े का इस्तेमाल किया जा सकता है।

घर की हवा साफ रखने के लिए अपनाएं ये आसान तरीके (Indoor Air Pollution)

घर में इस्तेमाल होने वाली हर चीज को पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है। कुछ सावधानियां अपनाकर घर के अंदर प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है।

  • मौसम और बाहरी हवा की गुणवत्ता अनुकूल होने पर खिड़कियां खोलें, ताकि ताजी हवा आ सके।
  • तेज खुशबू वाले स्प्रे और एयर फ्रेशनर का इस्तेमाल सीमित रखें।
  • कॉइल, अगरबत्ती और मोमबत्तियों से निकलने वाले धुएं को जमा न होने दें।
  • सफाई के केमिकल इस्तेमाल करते समय कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें।
  • घर में धूल और सीलन जमा न होने दें।
  • बच्चों और सांस संबंधी बीमारी से परेशान लोगों को धुएं और तेज गंध से दूर रखें।

लगातार खांसी या सांस फूलने पर क्या करें?

अगर घर में रहने के दौरान बार-बार खांसी आती है, गले में जलन होती है या सांस लेने में परेशानी बढ़ती है, तो इसके संभावित कारणों पर ध्यान दें। तेज गंध या धुएं से परेशानी बढ़ती दिखाई दे तो उससे दूरी बनाएं और डॉक्टर से सलाह लें।

सांस लेने में गंभीर परेशानी, सीने में तेज जकड़न या होंठ नीले पड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। लगातार खांसी को केवल घर के प्रदूषण का असर मानकर नजरअंदाज न करें, क्योंकि इसके पीछे संक्रमण, एलर्जी या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।

कुल मिलाकर, घर को साफ और खुशबूदार रखने के साथ उसकी हवा को स्वच्छ बनाए रखना भी जरूरी है। रोजमर्रा की छोटी-छोटी सावधानियां सांस संबंधी परेशानियों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं।

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